शुरू होने जा रही गधी के दूध की डेयरी, 1 लीटर की कीमत 7000 रुपये; जानें इसके फायदे

 
शुरू होने जा रही गधी के दूध की डेयरी, 1 लीटर की कीमत 7000 रुपये; जानें इसके फायदे
कविता शर्मा Mon, 10 Aug 2020-3:51 pm,

शुरू होने जा रही गधी के दूध की डेयरी, 1 लीटर की कीमत 7000 रुपये; जानें इसके फायदे
   
आज तक आपने केवल गाय या भैंस की डेयरी देखी होगी, लेकिन बहुत जल्द ही गधी के दूध की भी डेयरी खुलने वाली है.



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नई दिल्ली: भारत में कई दुधारू पशुओं का पालन किया जाता है. इसमें गाय, भैंस या बकरी शामिल हैं. वैसे अभी तक आपने गाय, भैंस, बकरी या ज्यादा से ज्याद ऊंट के दूध का सेवन किया होगा या सुना होगा. मगर देश में पहली बार कुछ ऐसा होने जा रहा है, जो आपको हैरानी में डाल देगा. जी हां, आज तक आपने केवल गाय या भैंस की डेयरी देखी होगी, लेकिन बहुत जल्द ही गधी के दूध की भी डेयरी खुलने वाली है.


देश में राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) हिसार में गधी के दूध की डेयरी शुरू होने जा रही है. एनआरसीई हिसार में हलारी नस्ल की गधी के दूध की डेरी शुरू होने जा रही है. जिसके लिए एनआरसीई ने 10 हलारी नस्ल की गधियों को पहले ही मंगा लिया था. फिलहाल इनकी ब्रीडिंग की जा रही है. 


गधे को अब तक आप मजाक का पात्र समझते थे तो अब आपको सोच बदलने की जरूरत है. क्योंकि गधी का दूध इंसानों के लिए ना सिर्फ बेहद फायदेमंद होता है बल्कि शरीर का इम्यून सिस्टम ठीक करने में काफी बड़ी भूमिका निभाता है. 


हलारी नस्ल की खासियत
यह नस्ल गुजरात में पाई जाती है. जिसके दूध को दवाइयों का खजाना माना जाता है. लहारी नस्ल की गधी में कैंसर, मोटापा, ऐलर्जी जैसे बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है. 


बच्चों को नहीं होती गधी के दूध से ऐलर्जी
कई बार गाय या भैंस के दूध से छोटे बच्चों को ऐलर्जी हो जाती है मगर हलारी नस्ल की गधी के दूध से कभी ऐलर्जी नहीं होती. गधी के दूध में ऐंटीऑक्सिडेंट, एनटीएजिंग तत्व पाए जाते हैं. जबकि दूध में फैट नाममात्र होता है. गधी के दूध पर शोध का काम NRCE के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर बीऐन त्रिपाठी ने शुरू कराया था. 


1 लीटर दूध की कीमत 7 हजार
ब्रीडिंग के बाद हाई डेयरी का काम जल्द शुरू हो जाएगा. गधी का दूध बाजार में 2000 से लेकर 7000 रुपए प्रति लीटर तक में बिकता है. इससे ब्यूटी प्रॉडक्ट्स भी बनाए जाते हैं जो काफी महंगे होते हैं. गधी के दूध से साबुन, लिप बाम, बॉडी लोशन तैयार किए जा रहे हैं.



डेयरी शुरू करने के लिए NRCE हिसार के केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र और करनाल के नेशनल डेयरी रीसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की भी मदद ली जा रही है.





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